कल रात नींद नहीं आयीUmesh DobhalSep 27, 20221 min readकल रात भर नींद नहीं आई कल रात भर करवटें बदलता रहाकल रात कुछ अजीब थी कल रात भर प्यास सताती रहीआसपास कोई नहीं था इतनी सी बात थी और कल रातभर नींद नहीं आई। – उमेश डोभाल
सावधान !जब वे आते हैं और कहते हैं हम खुशियां लायेंगे तुम्हारी थकी हुई और उदास जिन्दगियों में वे झूठ बोलते होते हैं उनकी भाषा की नरमी में एक...
गुण्डासड़क पर ऐंठ कर आगे बढ़ता है गुण्डा साथियों के बीच बादशाह है गैरों के बीच डरा हुआ सतर्क आदमी गुण्डा उन सामाजिक मूल्यों की उपज है नकारा...
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