top of page

सन्नाटे में किसको ढूंढें

  • Writer: Umesh Dobhal
    Umesh Dobhal
  • Sep 27, 2022
  • 1 min read

नीम की छांव

और कौओं की कांव-कांव

उदास है दुपहरी

उचाट है मन


हांफती चिरैया

मौन खड़े पेड़

उड़ती हुई धूल में

किसे पुकारें


नहीं बरसा आसमां

सूख गई माटी

खेतों को देखकर

कैसे धीर धरें


कौन है अपना

कौन पराया

सन्नाटे में

किसको ढूंढें।


– उमेश डोभाल

Recent Posts

See All
सावधान !

जब वे आते हैं और कहते हैं हम खुशियां लायेंगे तुम्हारी थकी हुई और उदास जिन्दगियों में वे झूठ बोलते होते हैं उनकी भाषा की नरमी में एक...

 
 
 
कल रात नींद नहीं आयी

कल रात भर नींद नहीं आई कल रात भर करवटें बदलता रहा कल रात कुछ अजीब थी कल रात भर प्यास सताती रही आसपास कोई नहीं था इतनी सी बात थी और कल...

 
 
 

Comments


bottom of page